Wednesday, December 8, 2021
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इसे कार नहीं रेल कहेंगे, गाड़ी पर लैंड हो जाता है हेलीकॉप्टर, अंदर है शानदार स्विमिंग पूल के साथ बहुत कुछ

साल 1986 में एक कार को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था “द अमेरिकन ड्रीम” के नाम से फेमस लेमोजीन कार को दुनिया की सबसे लंबी कार होने का गौरव हासिल है।

आपने कई महंगी-महंगी और लग्जरी कार देखी होंगी लेकिन क्या आपने कभी ऐसी कार देखी है जो इतनी बड़ी हो कि उस पर हेलीकॉप्टर की उतर सके चलिए आज हम आपको बताते हैं एक ऐसी गाड़ी के बारे में जो इंसानी जरूरत की हर सुख सुविधा से भरपूर है जहां इंसान इस सुविधा की सारी चीजें मुहैया है 100 फीट की लंबी इस गाड़ी को गिनीज बुक वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी शामिल किया जा चुका है इसकी लंबाई इतनी ज्यादा है कि लोग देखते ही रह जाते हैं आइए जानते हैं इस खास कार के बारे में जिसकी एक झलक आपको भी दीवाना बना सकती है।

30.5 मीटर लंबी है यह कार
इस गाड़ी ने वर्ष 1986 में दुनिया की सबसे लंबी कारों में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाया था ‘द अमेरिकन ड्रीम’ के नाम से मशहूर इस कार को दुनिया की सबसे लंबी कार होने का गौरव हासिल है। इस कार की लंबाई 30.5 मीटर यानी 100 फीट है। इस कार को किसी कंपनी ने नहीं बल्कि फिल्म के लिए एक गाड़ियों के जाने-माने डिजाइनर जे ओरबर्ग ने डिजाइन किया था अमेरिका के कैलिफॉर्निया में रहने वाले जे ओरबर्ग को कारों का बहुत शौक था और वो कई तरह की कारों की शानदार डिजाइन बना चुके हैं।

आपको यह भी जानकर हैरानी होगी की इस कार पर उतरते थे हेलीकॉप्टर

यह कार 1980 में डिजाइन की गई थी 100 फीट लंबी इस कार में 26 टायर थे और इसे दोनों तरफ से ड्राइव किया जा सकता था। डिजाइनर जे ओरबर्ग ने इस कार को 1980 के दशक में डिजाइन किया था और वह यह डिजाइन साल 1992 में पूरा हुआ था।कार के आगे और पीछे इंजन लगे थे खास बात ये है कि ये कार बीच से मुड़ भी सकती थी। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस कार में स्विमिंग पूल, जकूजी, बाथ टब, छोटा गोल्फ कोर्स, कई टीवी, फ्रिज, और टेलीफोन और हेलीपैड जैसी सुविधाएं थीं इस कार में 70 लोग बैठ सकते थे।
वैसे तो ये कार फिल्मों में यूज करने के लिए बनाई गई थी उस समय इसका किराया 14 हजार रुपये प्रति घंटे था लेकिन धीरे-धीरे कार की मेंटेनेंस पर ध्यान कम दिया जाने लगा कार को पार्किंग के लिए बड़ी जगह चाहिए होती थी और फिल्मों में भी ऐसी कारों की डिमांड कम हो गई इसलिए इसकी बर्बादी होने लगी बाद में एक कार म्यूजियम ने कबाड़ हो चुकी इस कार को खरीदा था और अब उन्होंने कार को रिपेयर करने का काम शुरू कर दिया था।

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