Wednesday, December 8, 2021
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ईश्वर का उपहार है बेटी

ईश्वर का उपहार है बेटी

दुनियाँ को प्यार है देती ।
ईश्वर का उपहार है बेटी ।।
जिसके घर आँगन आती है।
खुशियाँ खुद ही आ जाती है ।।
उत्सव का संसार है बेटी ।।।
कभी बहन बन कर आती है।
भाई के घर की थातीं है ।।
भाई के घर का सत्कार है बेटी ।।।
कहीं किसी की माँ बन आती।
सारे अपने फर्ज निभाती ।।
ममता का संसार है देती ।।।
पत्नी बन कर भो आती ।
सारे अपने फर्ज निभाती ।।
सृष्टि का उपहार है देती ।।।
कभी कभी कलुषित समाज मे।
करें प्रताड़ित काम काज में ।।
सहती दर्द अपार है बेटी ।।।
कहीं दरिंदे दानव बनकर ।
मोल भाव करते है तन कर।।
नहीं कोई व्यापार है बेटी ।।।
बेटी दुर्गा बन सकती है ।
लक्ष्मीबाई जन सकती है।।
करती दुष्टों का संहार है बेटी ।।।
सब को खूब प्यार लुटाती ।
खुद भूखी सो जाती।।
सब्र का भंडार है बेटी ।।।
ईश्वर का उपहार है बेटी ।।।
धीरपाल सिंह
स्वर्ण जयंती विहार कानपुर नगर

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