Saturday, February 24, 2024
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कोरोनावायरस से हम नहीं होते परेशान।

राखी सरोज
कोरोनावायरस के चलते मार्च महीने में सभी कुछ बंद कर देने का फैसला लेते हुए, सरकार ने सम्पूर्ण लॉक डाउन लगाने का फैसला लिया था। जिसे धीरे-धीरे कर अब खोला जा रहा है। अन लॉक वन में बाजारों-दुकानो सहित, धार्मिक स्थलों को खोलने का फैसला लिया गया। अब मॉल-रेस्टोरेंट भी खुल रहें है। ताकि लोगों द्वारा लॉक डाउन में मानसिक रूप से परेशान हो कर घरों में बंद रहते हुए सहन कर रहें तनाव में कुछ कमी लाई जा सकें। साथ ही साथ केन्द्र और राज्यो के खज़ाने में भी कुछ खनक सुनाई दे जो कोरोना काल की भेंट चढ़ गया है।

किन्तु सरकार के बाजार-मॉल इत्यादि खोल देने के बाद भी लोग अपने घरों से बाहर नहीं आ रहें हैं। सरकार द्वारा जा रही विपदा के समय छूट का हमारे देश के लोगों द्वारा कोई लाभ उठाने की कोशिश नहीं की जा रही है। वह अपने घरों में ही बंद है। इन गर्मी के दिनों में भी मॉल में लगें एसी का मजा लेने की लोगों में कोई ख्वाहिश नहीं दिख रही है। लोग गर्मी के मौसम में भी ठंडे पड़े हैं। हमारे देश के लोगों को मानों अब कोरोनावायरस से बचने के लिए सरकार और डॉक्टरों पर कुछ ज्यादा यकीन नहीं है‌‌।

शादियों का बाजार भी इस समय ना के बराबर हो रहा है। फिर भी फैशन इस तरह लोगो को प्रभावित करता है कि आज के समय में दुल्हन और दूल्हे के लिए उनके कपड़ों से मेचिंग मास्क भी बाजारों में उपलब्ध हैं। साथ ही साथ ऑनलाइन शादी करवाने का पैकेज भी आ चुका है। लोगों को कपड़े खरीदना, इलाज करवाना, अन्य कोई छोटे मोटे कामों से तो कोरोनावायरस ने रोक लिया, लेकिन शादी करने से नहीं रोक पाया। जन्मों-जन्मों का संबंध जोड़ने वाले सात फेरों की ताकत इतनी अधिक है कि चाइना का वायरस भी उसके सामने हार मान चूका है।

लॉक डाउन में हुई शादी में यदि किसी दुल्हन के पॉजिटिव होने पर, उसके पति समेत शादी में सम्मिलित हुए सभी रिश्तेदारों को क्वॉरेंटाइन करना पड़ता है। तब देश में नियमों का सही से पालन ना करने की खबर भी सामने आ जाती है। किन्तु इसमें परेशान होने या दुखी होने की बात नहीं है। विवाह बंधन सब से अधिक महत्वपूर्ण है। इसके लिए सभी नियमों का उल्लघंन भी किया जा सकता है ओर अपनी और अपनों की जान को दाब पर लगाया जा सकता है। विवाह करना नेक कार्य है। उसके लिए आपदा काल में भी रूकने और विचार करने की आवश्यकता नहीं है।

यदि लोग भूख से परेशान हैं। तो हम को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। शादी के लिए लाखों का बजट रखा है। उसका इस्तेमाल अभी नहीं हुआ कोई बात नहीं हम बाद में सभी को पार्टी दे कर इस्तेमाल करेंगे। लेकिन एक भी रूपया आस-पास किसी परेशान व्यक्ति को नहीं देंगे। शराब और विवाह के लिए पैसे देंगे, लेकिन कभी भी किसी पैदल जातें व्यक्ति के बारे में सोच उसके कदमों को राहत नहीं देंगे। आपदा का समय है फिर भी हम राजनीति करेंगे। राजनेता नहीं हुए तो क्या हुआ। धर्म के नाम पर खुद को बांट खुद को बरबादी की राह पर ले जा कर अपनों का भविष्य खोखला करना हमें आता है। दुनिया या देश पर कोई भी परेशानियां आएं‌। हमें फर्क नहीं पड़ता है। परेशान लोगों के आंसू पोंछने का प्रयास करने कि जगह हम सोशल मीडिया पर लोगों को दिखाने के लिए मददगार बन तस्वीरें साझा करेंगे। कोरोना वायरस का प्रमाणपत्र सांझा कर प्रसन्नता हासिल कर खुश हो जाएंगे। किसी मजबूर के दर्द और दुःख को बिना समझे।

कोरोनावायरस ने हमारे चेहरों पर लगे मुखौटे हटा दिए हैं और यह असली चेहरे इतने अधिक निंदनीय है कि हम खुद से ही आंख नहीं मिला सकते हैं। इसलिए मास्क लगाकर खुद से खुद को बचा रहे हैं। अब हमारी और हमारी सरकारों की हकीकत के साथ ही साथ आज हमारी स्वास्थ्य सुविधाओं की भी हकीकत सामने आ गई है। अब भी यदि हम नहीं सुधरे तो हमें कोई नहीं बचा सकता है।

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