Tuesday, October 19, 2021
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तुम वही बादल हो

तुम वही बादल हो

तुम वही बादल हो
बरसाती ।
उमड़ घुमड़ कर
बरसात करते हो।
अपने जल से
खेत खलियान भरते हो।।
खेतो में लाते हो हरियाली
किसानों में खुशहाली ।।
खजूर से भी लंबे हैं तेरे हाथ
उन्हें हम छू नही पाते ।
धरती पर आते
पानी पानी हो जाते हो ।।
तुम वही बादल हो ?
अजीब हाल तुम्हारा ।
किसी ने क्या बिगाड़ा ।।
जब क्रोधित हो जाते हो
प्रलय का रूप लाते हो
विकराल उग्र ज्वाल।
बनके सब का काल।।
धरती अम्बर एक कर जाते हो।।
तुम वही बादल हो ?
हरियाली देने वाले ।
खुशहाली बोने वाले
तुमसे ये आस नही ।।
तुम्हारा ये वर्ताव ।
कुछ खास नही ।।
होता विश्वास नही
तुम वही बादल हो?
तुम्हारे पास जल का भंडार है ।
प्रकृति का संसार है।।
किस बात से लाचार हो।
सब को थर्राते हो ।
जब प्रलय लाते हो
तुम वही बादल हो ?

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