Wednesday, October 20, 2021
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नवरात्रि का पहला दिन, जानिए मां शैलपुत्री की पूजा विधि, मंत्र और शुभ मुहू

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्र।

आज नवरात्रिि के पहले दिन मां शैलपुत्री की उपासना की जायेगी। आज मां शैलपुत्री की उपासना करने से व्यक्ति को धन-धान्य, ऐश्वर्य, सौभाग्य तथा आरोग्य की प्राप्ति होती है । आज इन सब चीज़ों का लाभ उठाने के लिये देवी मां के इस मंत्र से उनकी उपासना करनी चाहिए ।

नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करना बड़ा ही फलदायी बताया गया है | जो व्यक्ति दुर्गासप्तशती का पाठ करता है वह हर प्रकार के भय, बाधा, चिंता और शत्रु आदि से छुटकारा पाता है, साथ ही उसे हर प्रकार के सुख-साधनों की प्राप्ति होती है। जानिए मां शैलपुत्री की पूजा विधि और मंत्र।

शारदीय नवरात्रिि शुरू, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त-
घट स्थापना मुहूर्त : सुबह 6 बजकर 17 मिनट से 7 बजकर 7 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त: 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 38 मिनट
लाभ का चौघड़िया: दोपहर 12 बजकर 14 मिनट से दोपहर 1 बजकर 42 मिनट
अमृत के चौघड़िया: 1 बजकर 42 मिनट से शाम 3 बजकर 9 मिनट तक

जाने कैसे पड़ा शैलपुत्री नाम

पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण माता का नाम शैलपुत्री पड़ा। माता शैलपुत्री का जन्म शैल या पत्थर से हुआ। इसलिए इनकी पूजा से जीवन में स्थिरता आती है। उपनिषदों में मां को हेमवती भी कहा गया है।

मां शैलपुत्री का मंत्र

कहा जाता हैं कि आज के दिन माता शैलपुत्री की पूजा करने और उनके मंत्र का जप करने से व्यक्ति का मूलाधार चक्र जाग्रत होता है। अतः माता शैलपुत्री का मंत्र

वन्दे वाञ्छित लाभाय चन्द्र अर्धकृत शेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

इस प्रकार माता शैलपुत्री के मंत्र का कम से कम 11 बार जप करने से आपका मूलाधार चक्र तो जाग्रत होगा ही, साथ ही आपके धन-धान्य, ऐश्वर्य और सौभाग्य में वृद्धि होगी और आपको आरोग्य तथा मोक्ष की प्राप्ति भी होगी।

मंत्र है
‘ऊं ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम:।’
आज आपको अपनी इच्छानुसार संख्या में इस मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए । मंत्र जाप के साथ ही शास्त्रों में बताया गया है कि नवरात्रि के पहले दिन देवी को
शरीर में लेपन के तौर पर लगाने के लिए चंदन और केश धोने के लिए त्रिफला चढ़ाना चाहिए । त्रिफला में आंवला, हरड़ और बहेड़ा डाला जाता है। इससे देवी मां प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों पर अपनी कृपा बनाये रखती हैं।

इस दिशा में मुंह करके करें देवी माँ की उपासना

देवी मां की उपासना करते समय अपना मुंह घर की पूर्व या उत्तर दिशा की ओर करके रखना चाहिए।

मां शैलपुत्री की पूजा विधि

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की उपासना की जायेगी। मां शैलपुत्री की उपासना करने से व्यक्ति को धन-धान्य, ऐश्वर्य, सौभाग्य तथा आरोग्य की प्राप्ति होती है। आज के दिन इन सब चीज़ों का लाभ उठाने के लिये देवी मां के इस मंत्र से उनकी उपासना करनी चाहिए। मंत्र है- ‘ऊं ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम:।’

आज के दिन आपको अपनी इच्छानुसार संख्या में इस मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए। इससे आपको हर तरह के सुख-साधन मिलेंगे। मंत्र जाप के साथ ही शास्त्रों में बताया गया है कि नवरात्रि के पहले दिन देवी के शरीर में लेपन के तौर पर लगाने के लिए चंदन और केश धोने के लिए त्रिफला चढ़ाना चाहिए । त्रिफला बनाने के लिए आंवला, हरड़ और बहेड़ा को पीस कर पाउडर बना लें। इससे देवी मां प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों पर अपनी कृपा बनाये रखती हैं।

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