Wednesday, December 8, 2021
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प्रिय मुझे मिलना है

प्रिय मुझे मिलना है

हो रहीं रिमझिम सी बरसात
कटे न तुम बिन मेरी रात।
आ रही तेरी बस याद
प्रिय मुझे मिलना है।।
तुम करो न कोई बात
तुम्हारे बैरन से जज़्बात।
दे रहे दिल मे हैं आघात
प्रिय मुझे मिलना।।
बीते कई महीने साल
अभी भी दिल में तेरे मलाल।
निकालो अब तो बुरे ख्याल
प्रिय मुझे मिलना है।।
मन मेरा हुआ हतास
दबाये बैठा मन की प्यास।
करो आ पूरी मेरी आस
प्रिय मुझे मिलना है।।
हैं बड़े बुरे हालात
सुनें न कोई मन की बात।
निभाओ अब तो मेरा साथ
प्रिये मुझे मिलना है।।
कटेना कटे एकाकी रात ।
कब आओगे मेरे पास
कब होगी गुलशन मेरी रात।।
प्रिय मुझे मिलना है
कब आएगा मधुमास
बुझेगी मेरे मन की प्यास।
निभाओगी पूरा साथ
प्रिय मुझे मिलना है ।।
कसम खायी पकड़ कर हाथ
निभाएंगे जीवन भर साथ ।
भूली तुमको क्यू वो बात
प्रिय मुझे मिलना है ।।
आएं कैसे भी हातात
न छोड़ेंगे हम तेरा साथ ।
तुम्हीं से मेरे सब जज्बात
प्रिय मुझे मिलना है ।।
धीरपाल सिंह
स्वर्ण जयंती विहार कानपुर नगर

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