Wednesday, December 8, 2021
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मुझे घर जाना है

मुझे घर जाना है

छुट्टी दे दो साब(साहब)
मुझे घर जाना है।
बापू है बीमार
मूझे घर जाना । ।
सन्देशा घर से आया है।
माई ने बुलवाया है ।।
संकट में है प्राण
मुझे घर जाना है ।।
कई माह से बीमारी है ।
उम्र की भी लाचारी है ।।
चलने से लाचार
मुझे घर जाना है ।।
पाला पोषा बड़ा किया ।
जीवन के रण में खड़ा किया।।
अब कन्धें है लाचार
मुझे घर जाना है।।
मेरे खातिर सब कुछ भूले।
संघर्षों के झूले झूले।।
देना है आराम
मुझे घर जाना है ।।
सांध्य काल की बेला आयी ।
दूर हो रही है परछाई ।।
कब हो जाये शाम
मुझे घर जाना है ।।
खुशियों के सब गुलशन प्यारे।
मेरी हर जिद पर वारे।।
संघर्ष मेरा अभिमान
मुझे घर जाना है ।।
इच्छा है कुछ फर्ज निभाऊं
जीवन भर के कर्ज चुकाऊं
धर्म का रख्खू मान
मुझे घर जाना ।।
संघर्षों की काली छाया ।
दर्द बहुत जीवन मे पाया।।
मिल जाये विश्राम
मुझे घर जाना है ।।
धीरपाल सिंह
स्वर्ण जयंती विहार कानपुर नगर

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