Wednesday, December 8, 2021
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लिव-इन रिलेशनशिप कब क़ानून की नज़र में सही हैं? क्या है मैरिटल रेप और क्यों है विवाद?

लिव-इन रिलेशनशिप, यानी शादी किए बगैर लंबे समय तक एक घर में साथ रहने पर बार-बार सवाल उठते रहे हैं किसी की नज़र में ये मूलभूत अधिकारों और निजी ज़िंदगी का मामला है, तो कुछ इसे सामाजिक और नैतिक मूल्यों के पैमाने पर तौलते हैं।

एक ताज़ा मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे दो व्यस्क जोड़ों की पुलिस सुरक्षा की मांग को जायज़ ठहराते हुए कहा है कि ये “संविधान के आर्टिकल 21 के तहत दिए राइट टू लाइफ़” की श्रेणी में आता है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से कहा था कि दो साल से अपने पार्टनर के साथ अपनी मर्ज़ी से रहने के बावजूद, उनके परिवार उनकी ज़िंदगी में दखलअंदाज़ी कर रहे हैं और पुलिस उनकी मदद की अपील को सुन नहीं रही है। कोर्ट ने अपने फ़ैसले में साफ़ किया कि, “लिव-इन रिलेशनशिप को पर्सनल ऑटोनोमी (व्यक्तिगत स्वायत्तता) के चश्मे से देखने की ज़रूरत है, ना कि सामाजिक नैतिकता की धारणाओं से”। भारत की संसद ने लिव-इन रिलेशनशिप पर कोई क़ानून तो नहीं बनाया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसलों के ज़रिए ऐसे रिश्तों के क़ानूनी दर्जे को साफ़ किया है

भारत में पति जब पत्नी से बलात्कार करे तो इसे अपराध क्यों नहीं माना जाता?

पितृसत्तात्मक माने जाने वाले भारतीय समाज में, जहां शादियों को पवित्र रिश्ता माना जाता है वहां एक पति का अपनी पत्नी के साथ रेप करना अपराध नहीं माना जाता । लेकिन हाल के हफ़्तों में भारत की अदालतों ने मैरिटल रेप पर जिस तरह के फ़ैसले दिए हैं, उससे शादी के भीतर जबरन सेक्स को अपराध करार देने की मांग एक बार फिर से जोर पकड़ती हुई दिख रही है।
गुरुवार को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जस्टिस एनके चंद्रवंशी ने कहा कि “एक पति द्वारा पत्नी के साथ यौन संबंध या अन्य किसी प्रकार की यौन क्रिया को रेप करार नहीं दिया जा सकता है, भले ही वो जबरन या उसकी मर्जी के ख़िलाफ़ किया गया हो”। इस मामले में पत्नी ने पति पर ‘अप्राकृतिक सेक्स’ और अन्य चीज़ों से रेप करने का आरोप लगाया था।

बलात्कार के आरोप से बरी होते पति
जस्टिस एनके चंद्रवंशी ने कहा कि पति पर ‘अप्राकृतिक सेक्स’ के लिए केस चलाया जा सकता है लेकिन इससे कहीं अधिक गंभीर रेप के आरोप से अभियुक्त को बरी कर दिया गया क्योंकि भारतीय क़ानून में मैरिटल रेप कोई अपराध नहीं है, बशर्ते पत्नी की उम्र 15 साल से कम न हो।

क्या है मैरिटल रेप और क्यों है विवाद?
भारत में ‘वैवाहिक बलात्कार’ यानी ‘मैरिटल रेप’ कानून की नज़र में अपराध नहीं है. यानी अगर पति अपनी पत्नी की मर्ज़ी के बगैर उससे जबरन शारीरिक संबंध बनाता है तो उसे अपराध नहीं माना जाता।

केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में ‘मैरिटल रेप’ को ‘अपराध करार देने के लिए’ दायर की गई याचिका के ख़िलाफ़ कहा कि इससे ‘विवाह की संस्था अस्थिर’ हो सकती है । दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा, “मैरिटल रेप को अपराध नहीं करार दिया जा सकता है औस ऐसा करने से विवाह की संस्था अस्थिर हो सकती है पतियों को सताने के लिए ये एक आसान औजार हो सकता है” ऐसे में ये सवाल पूछा जा सकता है कि ‘रेप’ और ‘मैरिटल रेप’ में क्या फर्क है और विवाह की संस्था का इससे क्या संबंध है?

क्या है रेप
आईपीसी की धारा 375 के मुताबिक़ कोई व्यक्ति अगर किसी महिला के साथ अगर इन छह परिस्थितियों में यौन संभोग करता है तो कहा जाएगा कि रेप किया गया।

1. महिला की इच्छा के विरुद्ध।

2. महिला की मर्जी के बिना।

3. महिला की मर्जी से, लेकिन ये सहमति उसे मौत या नुक़सान पहुंचाने या उसके किसी करीबी व्यक्ति के साथ ऐसा करने का डर दिखाकर हासिल की गई हो।

4. महिला की सहमति से, लेकिन महिला ने ये सहमति उस व्यक्ति की ब्याहता होने के भ्रम में दी हो।

5. महिला की मर्जी से, लेकिन ये सहमति देते वक्त महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं हो या फिर उस पर किसी नशीले पदार्थ का प्रभाव हो और लड़की कंसेट देने के नतीजों को समझने की स्थिति में न हो।

6. महिला की उम्र अगर 16 साल से कम हो तो उसकी मर्जी से या उसकी सहमति के बिना किया गया सेक्स।

अपवाद, पत्नी अगर 15 साल से कम की हो तो पति का उसके साथ सेक्स करना रेप नहीं है

क्या है मैरिटल रेप
आईपीसी या भारतीय दंड विधान रेप की परिभाषा तो तय करता है लेकिन उसमें वैवाहिक बलात्कार या मैरिटल रेप का कोई जिक्र नहीं है । धारा 376 रेप के लिए सजा का प्रावधान करता है और आईपीसी की इस पत्नी से रेप करने वाले पति के लिए सजा का प्रावधान है बर्शते पत्नी 12 साल से कम की हो । इसमें कहा गया है कि 12 साल से कम उम्र की पत्नी के साथ पति अगर बलात्कार करता है तो उस पर जुर्माना या उसे दो साल तक की क़ैद या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं । 375 और 376 के प्रावधानों से ये समझा जा सकता है कि सेक्स करने के लिए सहमति देने की उम्र तो 16 है लेकिन 12 साल से बड़ी उम्र की पत्नी की सहमति या असहमति का कोई मूल्य नहीं है।

क्या कहता है हिंदू मैरिज एक्ट
हिंदू विवाह अधिनियम पति और पत्नी के लिए एक दूसरे के प्रति कुछ जिम्मेदारियां तय करता है इनमें सहवास का अधिकार भी शामिल है । क़ानूनन ये माना गया है कि सेक्स के लिए इनकार करना क्रूरता है और इस आधार पर तलाक मांगा जा सकता है।

घरेलू हिंसा क़ानून
घर की चारदीवारी के भीतर महिलाओं के यौन शोषण के लिए 2005 में घरेलू हिंसा क़ानून लाया गया था ये क़ानून महिलाओं घर में यौन शोषण से संरक्षण देता है इसमें घर के भीतर यौन शोषण को परिभाषित किया गया है।

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