Wednesday, December 8, 2021
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India v pakistan T-20: ‘ब्लैंक चेक में जो चाहे रक़म भर दो लेकिन भारत को हरा दो’

लाहौर में स्नोफॉल होने के चांस ज़्यादा हैं लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच अभी द्विपक्षीय सिरीज़ नहीं हो सकती हां, ये दोनों आईसीसी के टूर्नामेंट में भिड़ सकते हैं।

यह जवाब था भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर का जब पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और वर्तमान में पीसीबी के चेयरमैन रमीज़ राजा ने पिछले साल कोविड-19 के कारण लगे लॉकडॉउन के दौरान उनसे वीडियो चैट की पिछली बार भारत और पाकिस्तान साल 2019 में इंग्लैंड में हुए आईसीसी एकदिवसीय विश्व कप में आमने सामने हुए थे जहां भारत ने पाकिस्तान को डकवर्थ-लुइस नियम के आधार पर 89 रन से हराया और किसी भी प्रारूप के विश्व कप में हर बार पाकिस्तान को हराने का रिकार्ड बरक़रार रखा. अब यह दोनों एक बार फ़िर आईसीसी के ही टूर्नामेंट वर्ल्ड टी20 में ही आमने सामने होंगे 2021 आईसीसी वर्ल्ड टी-20 का आग़ाज़ 17 अक्तूबर से हो चुका है आधिकारिक रूप से भारत इसका मेज़बान है लेकिन मुक़ाबले संयुक्त अरब अमीरात और ओमान में खेले जा रहे हैं इसकी वजह वहां कोविड-19 से निपटने के बेहतरीन इंतज़ाम और बीसीसीआई के अपने सबसे बड़े घरेलू टूर्नामेंट आईपीएल का संयुक्त अरब अमीरात में सफलतापूर्वक किया गया आयोजन भी है।

क्रिकेट मैच जिसके लिए टीवी सेट तोड़ दिए जाया करते हैं

यूँ तो इस विश्व कप में बहुत सी बातें महत्वपूर्ण हैं लेकिन हमेशा की तरह दुनिया भर की निगाहें भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मैच पर लगी है. भारत और पाकिस्तान यह दोनों टीमें ग्रुप दो में शामिल हैं और यह 24 अक्तूबर को दुबई में आमने सामने होंगी भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी संबंध चाहें जैसे भी हो लेकिन क्रिकेट के मैदान में यह जैसे ही एक दूसरे के ख़िलाफ़ उतरते है उन्हें देखने के लिए दर्शक टिकट खिड़की खुलते ही सारे टिकट घंटे भर में ही ख़रीद लेते हैं मैच के बाद जो टीम जीत जाती है उसके देश में पटाखे फोड़कर जश्न मनाया जाता है और हारी हुई टीम के देश में मातम सा छा जाता है और सारा ग़ुस्सा टेलिविज़न सेट पर उतारा जाता है और उसे तोड़कर ग़म हल्का किया जाता है मैच जिताऊ खिलाड़ी रातों रात हीरो बन जाता है और अगर मैच का नतीजा आख़िरी ओवर में आया हो तो जिस गेंदबाज़ की बॉल पर हार मिलती है वो सबकी आंखों का काँटा बन जाता है, जैसे कि हार उसी की वजह से हुई है आज भी लोग शारजाह में हुआ वह मैच नहीं भूले हैं जब पाकिस्तान के जावेद मियाँदाद ने चेतन शर्मा की आख़िरी गेंद पर छक्का लगाकर पाकिस्तान को हैरतअंगेज़ जीत दिलाई थी. उसी तरह लोग यह भी नहीं भूले हैं कि कैसे साल 2007 में हुए पहले वर्ल्ड टी-20 में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने आख़िरी ओवर अनजान से गेंदबाज़ जोगिंदर शर्मा से करवाया और उन्होंने श्रीसंत के हाथों पाकिस्तान के मिस्बाह उल हक़ को कैच कराकर भारत को चैंपियन बनवाया।

उस एक ओवर की वजह से जोगिंदर शर्मा आज भी भारत में घर-घर में प्यार से जाने जाते हैं वहीं मिस्बाह उल हक़ अपने उस शॉट को आज भी भूल नहीं पाते महेंद्र सिंह धोनी के इतिहास के पन्नों पर करिश्माई कप्तान साबित होने की वह पहली कहानी थी उसके बाद उन्होंने भारत को साल 2011 में विश्व चैंपियन बनाया, टेस्ट क्रिकेट में नम्बर एक बनाया और चैंपियंस ट्रॉफ़ी भी जीती लेकिन क्रिकेट के दीवाने देश भारत में आज भी लोग चटखारे लेकर 2007 के वर्ल्ड टी20 की बातें याद करते हैं।

क्रिकेट मैच जिनसे यादें और भावनाएं भी जुड़ी हैं

अब जब भारत और पाकिस्तान एक बार फ़िर टी-20 विश्व कप में आमने सामने होंगे तों खिलाड़ियों की भी पुरानी यादें तो ताज़ा होंगी ही ख़ासकर तब जब यह दोनों देश केवल आईसीसी के टूर्नामेंट में ही आमने सामने होते हैं भारत पाकिस्तान मैच को लेकर पाकिस्तान के पूर्व बल्लेबाज़ मिस्बाह उल हक़ कहते हैं कि जब भी यह दोनों देश भिड़ते हैं तो इसके कोई मायने नहीं होते कि किस टीम की कौन सी रैंकिंग है और कौन कितनी कमज़ोर या मज़बूत है. मैच चाहे हॉकी का हो या क्रिकेट का, हमेशा बेहद रोमांचक होता है और ख़त्म भी ज़बरदस्त होता है भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर पाकिस्तान के कप्तान बाबर आज़म कहते हैं कि बड़े मैच में जाने से पहले यह महत्वपूर्ण है कि एक टीम के तौर पर आत्मविश्वास और ख़ुद पर भरोसा कितना है. टीम और खिलाड़ियों का मनोबल ऊंचा है जो बीत चुका है उसे छोड़कर हम आगे की सोच रहे हैं और आने वाले मैच के लिए पूरी तरह तैयार हैं और उस दिन अच्छी क्रिकेट खेलेंगे।

“भारत में मुझे कभी डर नहीं लगा, अकेले घूमने निकल जाता था”


सिकंदर बख्त कहते हैं, “भारत और पाकिस्तान दो पड़ोसी देश हैं और इनके आपसी रिश्ते सियासत के कारण ख़राब है वह दोबारा ज़ोर देकर कहते हैं कि सियासत ख़राब रिश्तों की वजह है जहां तक आम आदमी का ख्याल या विचार है वह सही है. मुझे भारत में जहां भी खेलने का मौक़ा मिला मैं अपनी आदत के कारण अकेला घूमने निकल जाता था”

“मुझे कभी भी, किसी भी जगह किसी भी शख़्स ने ऐसी बात नहीं कही जिससे मुझे डर लगा हो या मैंने अपने आप को अपमानित महसूस किया हो मेरी बातचीत के लहजे से सब पहचान जाते थे कि मैं पाकिस्तान से हूँ लेकिन मुझे कभी भी कहीं ख़ौफ़ नहीं लगा यही बाते हम भारत के क्रिकेटर से सुनते है, चाहें वह अदाकार यानि कलाकार हो उनसे सुनते हैं. यहॉ तक कि धोनी पर जो फ़िल्म बनी है उसमें भी यही दिखाया गया है ”

सिकंदर बख्त अपनी बात जारी रखते हुए कहते हैं कि ”उन्हें भी वह फ़िल्म बहुत पसंद है और उन्होंने उसे देखा भी है वह इस बात के लिए भारत के लोगों और फ़िल्म के डायरेक्टर की ख़ास तारीफ़ करते हैं कि उन्होंने वह सीन काटा नहीं. उन्हें फ़िल्म का वह हिस्सा पसंद है जहॉ धोनी को फ़ोन करना होता है और बड़े होटल का दुकानदार बात करने के लिए अपना फ़ोन पेश कर देता है जबकि उन दिनों मोबाइल का दौर नहीं था. वह उनसे कहता है कि आप जितनी चाहे उतनी देर बात करें वह उनसे पैसे या बिल की बात नहीं करता” “हो सकता है कि इस विश्व कप में यह रिकॉर्ड टूट जाए” “एक बार सुनील गावस्कर एशियन चैंपियनशिप में पाकिस्तान में कमेंट्री करने आए हुए थे और वह ख़ुद उन्हें ख़रीदारी के लिए ले गए किसी भी दुकानदार ने उनसे पैसे नहीं लिए यह बात आश्चर्यजनक है हमारे खिलाड़ियों और आम नागरिकों की आपसी समझ असाधारण है वह कहते हैं कि मैं बिना लाग लपेट के कह सकता हूँ कि यह बहुत ही ख़ूबसूरत रिश्तेदारी है”। सिकंदर बख्त कहते हैं कि, “मैं सियासी हालात और कारणों पर कोई टिप्पणी नहीं करूँगा यह मेरा क्षेत्र नहीं है, मैं तो खेल और नागरिकों की बात करूँगा हमारे क्रिकेट के रिश्ते बड़े ज़बरदस्त है. मुझे भारत के कलाकार और क्रिकेटर तब अच्छे लगते हैं जब वह पाकिस्तान के बारे में बातें करते हैं मेरी भी प्रतिक्रिया ऐसी ही है जब भी मैं भारत गया.”

“अब मैदान में जाकर क्या होता है यह बड़ा ही अजीबोग़रीब परिदृश्य है जो टूट नहीं पा रहा है चैंपियंस ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल के सिवाय. जां हम बड़ी आसानी से उनसे जीत गए इसके अलावा हमने उन्हें ढाका में भी हराया जहां शाहिद अफ़रीदी ने छक्के मारे हमने शारजाह में भी हराया जहां जावेद मियाँदाद ने आख़िरी गेंद पर छक्का मारा, पर यह जो आईसीसी का विश्व कप है बिलकुल समझ से बाहर है” “मैं कई बार बैठकर बहुत सोचता हूँ लेकिन इसका जवाब नहीं मिला. अब इसका मैं यही दे सकता हूँ कि रिकॉर्ड हमेशा टूटने के लिए ही बनते हैं और हो सकता है कि इस विश्व कप में यह रिकॉर्ड टूट जाए”

‘ब्लैंक चेक ले लो और भारत को हराकर जो चाहें अमाउंट भर दो’


सिकंदर कहते हैं कि “बुनियादी तौर पर हमारा रहना-सहना, खाना-पीना, कपड़े, माहौल एक जैसा ही है. फ़िल्में भी हम उनकी देखते हैं. कल्चर यानी संस्कृति लगभग एक जैसी है सिवाय इसके कि हमारा और उनका मज़हब थोड़ा अलग है. हमारा खाना-पीना एक है. मेरे वालिद ख़ुद दिल्ली के रहने वाले हैं, उनका पालन पोषण वहीं हुआ” “वह सेंट स्टीफ़न्स कॉलेज में गए, अलीगढ़ में पढ़े. मेरी वालिदा मद्रास की हैं. जब मैं भारत का दौरा कर रहा था तो उनके घर को देखने भी गया, तो मेरा ताल्लुक़ भारत से है. जो मोहब्बत हमें भारत में मिलती है या जो मोहब्बत उन्हें हमारे यहाँ मिलती है उसका कोई सानी नहीं है मगर सियासत है जिसकी वजह से हम उखड़े उखड़े से रहते हैं उसकी वजह कुछ और है आपने देखा होगा कि कई बार शादी में मेहंदी की रस्म होती है लेकिन दोनों तरफ़ के लोग एक ही होते हैं और एक दूसरे पर तंज करते हैं, गाने गाते हैं, एक दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं, लेकिन यह दोनों ससुरालिये बाज़ी जीतने के लिए ऐसा करते हैं लेकिन एक दूसरे से प्यार भी कर रहे होते हैं ऐसा मैं ख़ुद महसूस करता हूँ”

“जब 1979 में वह भारत का दौरा करने वाले थे तब वह अपने किसी दोस्त के घर में थे तभी दोस्त की वालिदा आई और कहने लगी कि तुम भारत जा रहे हो मगर हार कर मत आना अगर तुम हार गए तो फ़िर मेरे घर मत आना. मतलब बड़ा दबाव और हम वह सिरीज़ हार भी गए। “हमें याद है जब हम वापस पाकिस्तान लौटे तो किस तरह कस्टम की चैकिंग हुई थी वह भूल नहीं सकते. तब उन्होंने हमारे रिकॉर्ड्स और दूसरी तमाम तरह की चीज़ें रख ली थी वापिस नहीं की, तो जब हम भारत से हारकर आते हैं तो इस तरह का रिएक्शन होता है. अभी पूर्व कप्तान रमीज़ राजा जब पीसीबी चेयरमैन बनकर कराची आए तो वहां चेम्बर ऑफ कॉमर्स में लोगों से मुलाक़ात की” “वह बता रहे थे कि उनसे एक बड़े सेठ ने कहा कि तुम ब्लैंक चेक ले लो और भारत को हराकर जो चाहें अमाउंट उसमें भर दो, तो यह प्रेशर दबाव होता है. जब इस तरह की बातें होती हैं तो उसका असर खिलाड़ियों पर भी पड़ता है जब वह मैच से पहले रात को सोने जा रहा होता है तो उसके ख़्वाबों-ख्यालों में भी यही बातें चल रही होती है कि लोग हमें कैसे देख रहे है. अभी भी यही बाते चल रही है कि पहला मैच भारत से है और वह जीत जाए”

सिकंदर बख्त कहते हैं कि ”अगर हम हम भारत से पहला मैच जीत जाए तो फ़िर विश्व कप जीतने में आसानी हो जाएगी जो भी हो यह भारत और पाकिस्तान के बीच अजीब सी और दिलचस्प प्रतिद्वंद्विता है इंशाअल्लाह यह ऐसे ही बनी रहे. वैसे दोनों देशों के खिलाड़ियों में वैसी ही दोस्ती है जैसी हमारे समय में होती थी हांलाकि अब मिलना कम होता है लेकिन जब भी मिलते हैं तो पुरानी यादें ताज़ा करते है पिछले दिनों यह देखकर अच्छा लगा कि विराट कोहली ने अपना बल्ला शायद शाहबाज़ अहमद या शाहिद अफ़रीदी को दिया या लिया, लेकिन जो भी हो प्रतिद्वंद्विता है और रहेगी भी”

पहले खिलाड़ियों में थी निर्णय लेने की क़ाबिलियत


भारत पाक मैच को लेकर पाकिस्तान के एक और पूर्व ऑफ़ स्पिनर तौसीफ अहमद कहते हैं कि “हम जानते हैं कि यह एक खेल है जिसमें एक टीम जीतती है और एक टीम हारती है. हम अगर ऑस्ट्रेलिया से हार जाए तो कोई बात नहीं लेकिन जैसी परिस्थिति इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के मैच को लेकर होती है ठीक वैसी भारत और पाकिस्तान मैच में होती है. इसकी वजह भारत और पाकिस्तान के सदियों से चले आ रहे ताल्लुक़ हैं”

“भारत के ख़िलाफ़ मैंने भी बहुत क्रिकेट खेली है और वह दूसरी तरह का दबाव होता है वह खिलाड़ियों पर कम और अवाम पर ज़्यादा होता है जो टीम को हारते हुए देखना ही नहीं चाहते और फ़िर यही दबाव यक़ीनी तौर पर खिलाड़ियों में भी आ जाता है यही दबाव खिलाड़ी के लिए परेशानी है और उससे बचना बड़ी बात है”
“यह भावनाओं की बात है जिस पर क़ाबू पाना ज़रूरी है पहले के खिलाड़ी अब के खिलाड़ियों के मुक़ाबले जज़्बाती तौर पर बहुत मज़बूत थे जैसे जावेद मियाँदाद. इमरान खान में निर्णय लेने की क़ाबिलियत थी. भारत के ख़िलाफ़ पहले भी दबाव होता था लेकिन वह ज़ाहिर नहीं होने देते थे” “हम भारत में टेस्ट और एकदिवसीय सिरीज़ भी जीते तब खिलाड़ी भावनाओं पर क़ाबू रखते थे. अबके खिलाड़ियों में वह बात नहीं है, सच कहूँ तो अब भारत हावी रहने लगा है दबाव भारत पर भी होता है लेकिन अब भारत के पास गौतम गंभीर सरीखे खिलाड़ी आने लगे हैं जो बाक़ायदा जवाब देने लगे हैं” “भारत के पास पहले भी महान खिलाड़ी थे लेकिन एक जावेद भाई उन सब पर भारी पड़ते थे ख़ुद भारतीय खिलाड़ी भी मानते थे कि वह शानदार खिलाड़ी तो हैं ही साथ ही परेशान भी करते हैं जो खेल का एक हिस्सा है स्लेजिंग पहले भी थी और अब भी है लेकिन बहुत बुरी नहीं थी” तौसीफ अहमद आख़िर में कहते हैं कि उनकी ख़ुशनसीबी है कि वह जावेद मियाँदाद, इमरान ख़ान, मुदस्सर नज़र और रमीज़ राजा जैसे खिलाड़ियों के साथ खेले जो दबाव से निपटना जानते थे वह कहते हैं कि कुछ समय पहले की तो नहीं लेकिन अभी विश्व कप के लिए जो पाकिस्तानी टीम घोषित हुई है वह दबाव झेलना जानती है।

भारत विश्व कप T20 में

साल 2007 में हुए पहले विश्व कप में भारत और पाकिस्तान ग्रुप डी में एक साथ थे जहां भारत मैच के टाई रहने के बाद बॉल आउट में 3-0 से जीता इसके बाद फ़ाइनल में भारत ने पाकिस्तान को पाँच रन से हराया

इसके बाद साल 2009 में हुए अभ्यास मैच में भारत ने पाकिस्तान को नौ विकेट से हराया. इसके अलावा भारत पाक आमने सामने नहीं हुए, लेकिन पाकिस्तान श्रीलंका को फ़ाइनल में आठ विकेट से हराकर चैंपियन बना।

2010 में हुए विश्व कप में भारत पाक आमने सामने नहीं हुए।

2012 में हुए विश्व कप में भारत ने पाकिस्तान को सुपर 8 में आठ विकेट से मात दी।

2014 में हुए विश्व कप में भारत ने पाकिस्तान को सुपर-10 में ग्रुप मैच में सात विकेट से हराया।

2016 में हुए विश्व कप में भारत ने पाकिस्तान को सुपर-10 में ग्रुप दो के मुक़ाबले में छह विकेट से हराया.

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